भगवान शिव के रुद्राभिषेक से कष्टों से मुक्ति मिलती है

यदि कोई अपने एवं अपने परिवार के हित के लिए नित्य रुद्रा​भिषेक करना चाहता है, वह 4999 रु. की सहयोग राशि प्रत्येक मास गुरुकुल को प्रदान कर सकता है एवं हम उनके निमित्त नित्य रुद्राभिषेक करेंगे। वह नित्य इसका लाइव प्रसारण देख सकता है।

भोलेनाथ सबसे सरल उपासना से भी प्रसन्न होते हैं लेकिन रुद्राभिषेक उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है. रुद्राभिषेक से शिव जी को प्रसन्न करके आप भी अपने सभी मनोरथ पूर्ण कर सकते हैं।

पुराणों में शिव के बारे में कहा गया है कि सर्वदेवात्मको रुद्र: सर्वे देवा: शिवात्मका अर्थात सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। यह पूजा सभी वैदिक शास्त्रों द्वारा, यहां तक ​​कि आयुर्वेद शास्त्रों द्वारा भी, सर्वांगीण सफलता के लिए सबसे बड़ी पूजा के रूप में प्रशंसित है, जो सभी बुराइयों को दूर करती है और सभी ग्रहों के प्रभाव को निष्प्रभावी करती है। रुद्राभिषेक सभी प्रकार के पापों के प्रयाश्चित के रूप में में भी उत्तम है। रुद्राभिषेक से सभी रोगों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

रुद्राभिषेक किसे करना चाहिए ?

  • कोई भी व्यक्ति जो मृत्यु के भय से बहुत भय में है। उसे रुद्राभिषेक करना चाहिए।
  • यदि आप कुछ ग्रहों के बुरे प्रभाव से पीड़ित हैं, जो प्रतिकूल स्थिति में हैं।
  • यदि आप आसन्न कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
  • अगर आपके दुश्मन आपको परेशान कर रहे हैं ।
  • यदि कोई व्यक्ति असाध्य रोग से पीड़ित है।
  • अगर किसी को संतान नहीं हो रही है।
  • यदि कोई सभी प्रकार की सुख समृद्धि प्राप्त करना चाहता है। पुत्र, पौत्र, धन, धान्य, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति और मृत्यु से मुक्ति।

आज ही रुद्राभिषेक करवाएं

शिव भगवान के शुभाशीर्वाद से समृद्धि, धन-धान्य, विद्या और संतान की प्राप्ति के साथ-साथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाते हैं

हमारे बारे में

हम वैदिक ब्राह्मणों का एक समूह हैं जो वेद, वेदांत और कर्मकांडम में पारंगत हैं। आचार्य राजेश बेंजवाल, जो इस पूरे परियोजना का मार्गदर्शन कर रहे हैं, ने पूज्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी के अधीन आर्ष विद्या गुरुकुलमें वेद वेदांत का अध्ययन किया है। वह ग्रन्थ “तत्त्वबोध” के लेखक भी हैं। वे वैदिक सूक्तों का जप करने में पारंगत हैं और तंत्र परंपरा में भी पारंगत हैं। हमारे पास वेदपाठी, शास्त्री और आचार्यों का एक समूह है जो कर्मकांड में पारंगत हैं। वे भक्तों द्वारा प्रार्थित पूजा करेंगे।

श्री महेन्द्र दीक्षित

श्री महेन्द्र दीक्षित -- नाम:- महेंद्र दीक्षित, कुल:- जंगिड़ गोत्र:- मुद्गल वेद:- अथर्ववेद उपवेद:-- शिल्पवेद शाखा:- पिप्पलाद सूत्र:- अंगिरस त्रिप्रवर:- अंगिरा, भार्म्यश्व, मुद्गल, देवी:- सावित्री, मंत्र-: रुद्रगायत्री

श्री रोहित पाण्डेय

श्री रोहित पाण्डेय -- नाम:- रोहित, अष्पाद:- पाण्डेय, गोत्र:- सावर्णि, वेद:- सामवेद, उपवेद:- गन्धर्ववेद, शाखा:- कौथुमी, प्रवर:- सावर्ण्य, पुलस्त्य, पुलह, सूत्र:- गोभिल, पाद:- वाम, शिखा:- वाम, देवता:- विष्णु

श्री आयुष मिश्रा

श्री आयुष मिश्रा -- नाम:- आयुष अष्पाद:- मिश्र गोत्र:- भरद्वाज, वेद:- शुक्लयजुर्वेद, उपवेद:- धनुर्वेद, शाखा:- माध्यन्दिन, प्रवर:- अंगिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, सूत्र:- कात्यायन, पाद:-दक्षिण, शिखा:-दक्षिण, देवता:-शिव,

रुद्राभिषेक के बारे में लोग क्या बोलते हैं

हमारा कपड़ों का व्यापार है। पहले व्यापार बड़ा अच्छा चलता था लेकिन धीरे-धीरे कंपटीशन पड़ता गया और हमारा व्यापार मंदा होने लगा। बैंक का लोन भी काफी बढ़ गया। मकान भी लोन के कारण गिरवी रखना पड़ा लाभ होना भी बंद हो गया था। ऐसी परिस्थिति में हम आचार्यजी के पास गए आचार्यजी ने हमें रुद्राभिषेक करने के लिए कहा। हमने आचार्यजी से रुद्राभिषेक करवाया और इसका फल वास्तव में चमत्कारी था। हमारा व्यापार अब खुल गया और पुनः वही लाभ होने लगा है जो हमें पहले होता था। धीरे-धीरे कर्जा भी चुकाया जाने लगा। स्थिति में आशा के अनुरूप सुधार देखने को मिला। रुद्राभिषेक का फल वास्तव में चमत्कारी है।
Aishwarya Ghoshal
मेरी दोनों किडनी खराब होने लगी थी दवाइयों से आराम नहीं हो रहा था। क्रिएटिन का लेवल लगातार बढ़ रहा था एवं स्थिति लगातार बिगड़ ही रही थी। पैरों में सूजन आ चुकी थी ऐसे में आचार्यजी जी ने हमें कपालभाती करने को एवं रुद्राभिषेक कराने को कहा। आज छह मास के भीतर भीतर हमारी दोनों किडनी स्वस्थ हैं। आचार्यजी को बहुत-बहुत धन्यवाद उन्होंने हमारे प्राण रक्षा की। भगवान शिव इस दुनिया में सभी ऊर्जाओं के स्रोत हैं, वे पालनकर्ता भी हैं और जरूरत पड़ने पर वे पूरे ब्रह्मांड को नष्ट करने के लिए तैयार हैं। यदि हम यह अभिषेक करते हैं तो कुछ भी बुरा हमसे दूर जा सकता है ।
Akansha Rati
हमारी माता जी को कैंसर था और डॉक्टर ने 6 महीने का समय दिया था, कैंसर काफी एडवांस स्टेज में था I कहीं से कोई उपाय न देखकर हमने महामृत्युंजय करने की सोची उसी समय आचार्यजी ने हमें महामृत्युंजय के साथ रुद्राभिषेक करने के लिए कहा एवं साथ में गौमूत्र एवं हल्दी के पान के लिए कहा I हमने सवा लक्ष महामृत्युंजय करवाया एवं आचार्य जी ने नित्य रुद्राभिषेक किया I साथी ही साथ 3 माह तक नित्य गौमूत्र एवं हल्दी का पान करते रहे I अब हमारी माता जी का कैंसर बिलकुल हट चुका है I यह आश्चर्यजनक है किन्तु यह सत्य है आचार्य जी ने हमारी माता को नया जीवनदान दिया I
Anshu Chetri

अकसर पूछे जाने वाले सवाल

आप पूजा करने का फैसला करते हैं और आप हमारे साथ पूजा बुक करते हैं। साइन अप प्रक्रिया में हम सभी आवश्यक जानकारी एकत्र करते हैं और हम आपको अधिक जानकारी एकत्र करने और अपनी बुकिंग की पुष्टि करने के लिए काल करते हैं। जब आप साइन अप करने के बाद पूजा बुक करते हैं तो आप अपने संकल्प का उल्लेख कर सकते हैं और हम उस संकल्प के साथ पूजा करेंगे। यदि आपने पूजा की बुकिंग की है और हमने इसे स्वीकार कर लिया है तो यह हमारी गारंटी है कि यह किया जाएगा।

शास्त्रों के अनुसार यदि हम किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के संकल्प के साथ पूजा करते हैं तो यह इसी प्रकार कार्य करता है एवं लगभग उतना ही लाभ प्रदान करता है जैसे वह व्यक्ति स्वयं पूजा कर रहा हो। हम एक ऐसे व्यक्ति का उदाहरण ले सकते हैं जो एक अस्पताल में है, और हम उसके अच्छे स्वास्थ्य के लिए महामृत्युंजय करते हैं, और उसे इसका लाभ मिलता है। मुख्य निर्णायक कारक यह है कि हम किस संकल्प के साथ पूजा करते हैं, और भगवान सब कुछ जानते हैं।

इसका लाईव प्रसारण फेसबुक, यूट्यूब आदि माध्यमों से किया जाता है जहां आप इसे संकल्प के साथ देखकर इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं। आप नित्य ही इसे लाईव प्रसारित होता देख सकते हैं। आप कूरियर के माध्यम से प्रसाद प्राप्त करेंगे ।

यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस पूजा करने का फैसला करते हैं, हम रुद्राभिषेक के अलावा अन्य पूजा भी करते हैं। यह निश्चित है कि पूजा उस विशेष क्षेत्र में उच्च योग्य लोगों द्वारा की जाएगी जैसे कि वैदिक पूजा केवल योग्य वेदपाठी द्वारा की जाएगी।

  • हम ध्यान रखते हैं कि पारंपरिक शास्त्रीय विधान से पूजा की जाये, और हम सस्त्रिया पद्धति से समझौता नहीं करते हैं।
  • हम पहले से ही इन कर्मकाण्डों को बहुत लंबे समय से सफलता के उंचे प्रतिशत के साथ कर रहे हैं, वही हम अब आप तक ऑनलाइन पहुंचा रहे हैं।
  • हम यह ध्यान रखते हैं कि जब वेद ​​मंत्र का पाठ करने की बात आती है तो केवल हमारे पंडित जो वैदिक मंत्रोच्चार में पारंगत होते हैं, वही उस पूजा का सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उसका पाठ, जप करे।